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बसंती मतवाली 5



मैं अपनी बीवी के साथ घर पहुंच गई थी , वाइफ मेरे चेहरे को ध्यान से देख रही थी। मैंने घर जाकर वाइफ को चाय बनाकर दी। खाना हम लोग खाकर ही आये थे इसलिए वाइफ अपने बिस्टेर पे सो गई और मैं दुसरे रूम में लेट गई। जब से वाइफ ने मेरे को औरत बना दिया था तब से वो मुझे अपने साथ नहीं सुलाती थी इस वजह से मेरे पेनिस में कोई हरकत नहीं होती थी। मैंने अपने मन को भी समझा दिया था की अब मुझे ऐसी कोई हसरत नहीं पालनी चाहिए , क्युकी अब मैं पक्की औरत बन चुकी हु। मैं अभी बिस्टेर पर लेटकर करवाते ही बदल रही थी की कैलाश जी का फ़ोन आ गया , मैंने तुरंत फ़ोन कट करके साइलेंट कर दिया 





और कैलाश जी से मैसेज करने को कहा। हम दोनों घंटे भर बात करते रहे सच तो ये है की कैलाश जी को भी मैं पसंद आ गई थी। मेरे को भी कैलाश जी का साथ बहुत पसंद था मैं अब इसी औरत के रूप में रहना चाहती थी। कैलाश जी ने खा जल्दी ही वो मुझ से मिलेंगे। वो ये भी बोले की मेरे को प्यार करने में उनको भी ज्यादा मजा आता है। ये सुनकर मेरे मन को तस्सली हुई. . हम दोनों फ़ोन ऑफ करके सो गए। अगले दिन मैंने वाइफ के लिए नास्ता बना दिया और वो अपनी ऑफिस यूनिफार्म यानि की पेंट शर्ट टाई बेल्ट कोट सब पहन के ऑफिस चली गई। वाइफ के शूज़ मैं ही पहनाती थी . कुल मिला कर मैं वाइफ की वाइफ बन गई थी और मेरी वाइफ अब मेरे लिया हस्बैंड थी। वाइफ के ऑफिस जाने के बाद मैं कैलाश जी का इंतज़ार करने लगी।

कैलाश जी की कार मेरे घर के सामने आकर रुकी , कैलाश जी सीधे कमरे में आ गए और आते ही मुझे बैडरूम में जाकर बिस्टेर पे पटक दिया और फिर हम दोनों एक दूसरे में खो गए सच बोलू तो कैलाश जी का इस तरह से मुझे जबरदस्ती प्यार करना बहुत अच्छा लगा। मुझे संतुस्ती मिल गई थी कैलाश जी ने भी सेक्स करने के बाद कहा की उनको भी बहुत मजा आया। अब तो ये रोज का खेल हो गया था , वाइफ के जाने के बाद कैलाश जी मेरे पास आ जाते हम दोनों के बीच एक राउंड हो जाता और फिर हम दोनों दिन भर इन्ही यादों में खोये रहते। पर कहते हैं की इश्क़ और मुश्क़ छुपते। मेरे पड़ोसियों को ये बात पता लग चुकी थी उन्होंने वाइफ को बता दिया की आपके जाने के बाद कोई मर्द आता है जो आपकी कामवाली बाई के साथ एक घंटे रहता हैं और फिर चला जाता हैं.वाइफ ने जब ये सुना तो मेरे ऊपर चिल्लाने लगी। मैंने खा की कैलाश जी आये थे दो दिन मास यु ही मिलने के लिए बोल रहे थे की बच्चा आपको बहुत यद् करता हैं। और मेरे ऊपर क्यों चिल्ला रही हो मैं तो औरत नहीं हु बस तुमने एक मर्द को साड़ी ब्लाउज पहना कर औरत बना दिया हैं। उनको मेरे से क्या मिलेगा। वो चुप हॉ गई फिर बोली ठीक हैं पर तुमसे मिलने कोई आये ये मुझे पसंद नहीं लोगो की नज़र में तुम हमारी काम वाली बाई हो और एक औरत से मिलने कोई मर्द आये तो ये अच्छी बात नहीं हैं।

मैं सुनीता की बात को समझ रही थी पर अब मेरा तन और मन दोनों पूरी तरह से औरत का मन चूका था जो अब अपने प्रेमी के बिना नहीं रह सकती थी , इसलिए मेरे उप्पेर सुनीता की बात का कोई असर नहीं हुआ मैं और कैलाश जी इसी तरह मिलते रहे। एक दिन वाइफ ऑफिस गई और मई कैलाश जी के साथ बैडरूम में मस्ती कर रही थी तभी सुनीता आ गई , उसके पास रूम की चाभी थी वो सीधे अंदर आ गई उसने मेरे को कैलाश जी के साथ देख लिया। कैलाश जी तो तुरंत ही उठकर बिना कुछ बोले चले गए। पर मैं सुनीता के सामने ब्लाउज और पेटीकोट पहने खड़ी थी मेरी नज़रे झुकी हुई थी। वो बोली की तो अब तुम बिना मर्द के नहीं रह पति हो पूरी तरह से औरत बन चुकी हो। अब तुम्हारी शादी भी करवा देनी चाहिए। वो बिना कुछ बोले वापस चली गई ऑफिस और मैं अकेली घर में रह गई। कुछ देर बाद मैंने डोर बेल्ल बजने पे दरवाजा खोला तो देखा की|

 

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