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बसंती मतवाली 3




मैंने सिरुप पिया और बेहोश हो गया फिर क्या हुआ होगा ये मुझे पता नहीं। जब आंखे खुली तो मैंने खुद को बेड पे लेटे हुए पाया। मैंने धीरे धीरे अपनी आँखे खोली और देखा की मैंने नीले रंग की साड़ी ब्लाउज पहन रखा है , हाथो में दो दरजन चूडियन पहन राखी थी पैरो में पायल बिछिया , गले में हर मंगलसूत्र , पहना था।

मेरे हाथ अपने ब्रेस्ट पे गए वो अब सिलिकॉन के नहीं थे मेरे बूब्स काफी बड़े हो चुके थे , मेरे हाथ अचानक अपने पेनिस की तरफ गए तो मैंने पाया मेरा पेनिस अब एक छोटे बच्चे जैसा हो गया था , मुश्किल से १ इंच का था वो। मैं सन्न रह गई थी , कुल मिलकर मैं पूरी तरह से औरत बन गई थी तभी मैंने महसूस किया की कोई आ रहा है।


मैंने देखा की सामने मेरी वाइफ खड़ी थी , मुझे देख कर मुस्काराई और बोली कैसा लग रहा है। औरत बन के , मैंने कहा ये सब क्या है , वो बोली अब तुम पूरी तरह से औरत बन के मेरी फ्रेंड्स और दूसरी औरतो के साथ आराम से रह सकते हो। मैंने क्या किया है मेरे साथ। वाइफ बोली कुछ नहीं तुमको हार्मोन की हैवी डोस दी गई हैं। तुम्हारे बूब्स बड़े हो गए है और पेनिस छोटा। फेस पे हलकी प्लास्टिक सुरजरी की गई हैं। वैसे तुम काफी अच्छी लग रही हो

तभी दो औरत आ गई और मेरे को खड़ा किया मैं खड़ी हो गई और अपनी साड़ी का पल्लू सँभालने लगी। मुझे अपने शरीर में बदलाव तो लग रहा था पर एक अजीब सी फीलिंग भी लग रही थी। एक अजीब सा एहसास हो रहा था मैं खुद को एक औरत जैसा महसूस कर रही थी। मुझे ड्राइंग रूम में जाकर सोफे पे बैठ गई मुझे एक गिलास जूस पिलाया गया और अब मैं खुद को तरोताजा महसूस कर रही थी। तभी सुनीता मेरे पास आ गई और बोली मुझे अब भरोसा है की तुम एक औरत की जिंदगी जी सकोगे।

मैं कुछ बोल नहीं सकी बस हा में सर हिला दिया। मैं बस इंतज़ार करने लगा की अब अगला कदम क्या होगा। वाइफ ने कहा की अब आराम करो की कल से तुम नया जीवन शुरू कर रही हो। आओर है कल से मैं तुमको बसंती बोलूंगी और तुम भी मेरे को बीवी जी या मैडम जी ही बोलोगी। एक औरत की तरह ही चलोगी और बात करोगी। जब कोई मर्द मेरे साथ होगा या ऑफिस का कोई मेरे साथ होगा तो तुम अपने सर पे घूँघट रखोगी । चलो अब आराम से सो जाओ। इतना कहते हुए उसने मेरे गालो पे किश कर लिया।


मैं अब बिस्तर पे लेट गई साथ में सुनीता भी लेट गई। अगले दिन मई सुबह उठु कर पहले पूरे घर में झाड़ू लगाई और पोछा लगाया फिर बाथरूम में नहाने चली गई। नहा के बहार निकली तो सामने ब्यूटी पारलर वाली खड़ी थी आओ तुम्हारा मेकअप कर दू आज सुनीता की फ्रेंड्स आने वाली है तो नौकरानी को भी सुन्दर लगना चाहिए।मई बिना कुछ बोले साथ चली गई आधे घंटे बाद मई पूरी औरत बन के रेडी हो चुकी थी। मैंने वापस आकर किचन का काम संभल लिया मुझे छोले भठूरे बनाने थे इसलिए मैंने छोले प्रेशर कुकर में चढ़ा लिए अब मैं काम में जुट गई थी मैंने सब काम कर लिया आटा रेडी था। मैं भी आराम कर रही थी ग्यारह बज रहे थे सुनीता बार बार घडी देख रही थी। तभी उसकी दो सहेलिया पूनम और मोना आ गई। मेरी तरफ देखते हुए पूछा ये है तुम्हारी नौकरानी। काफी सुन्दर है अपने मर्द से बचा के रखना। कही वो फिसल न जाये इसकी खूबसूरती पर। उसकी बातो पे मुझे गुस्सा आ रहा था की सुनीता का मर्द नौकरानी पे कैसे फिसल सकता है , उसका मर्द ही तो नौकरानी सुनीता है ,साथ में मुझे एक संतुस्ती भी हुई की मैं एक रियल औरत लग रही हु और कोई भी ये नहीं शक कर पा रहा की मई सुनीता का पति हु. मई मुस्कराते हुए सबको नमस्ते बोली और फिर चाय बनाने अंदर चली गई। मैं चाय लेकर आयी तब तक दो सहेलिया आ चुकी थी उनमे से एक के साथ छोटा सा बेबी भी था दो साल का होगा। सब लोग चाय पीने लगे और सहेली ने अपना बेबी मेरे को देते हुए कहा जरा इसको बहार घुमा दो परेशां कर रहा है मैंने बच्चे को गोद में उठाया टहलने लगी वो बहुत ही शैतान था अपने हाथों से मेरे ब्लाउज के हुक् को खोलने की कोशिश कर रहा था। मुझे अपने ऊपर शर्म आ रही थी और साथ ही एक अलग तरह का एहसास हो रहा था की शायद मई रियल औरत होती तो माँ बनके बच्चे को दूध पिलाने का एहसास भी कर पति। मई बार बार बच्चे का हाथ अपने ब्लाउज पे अंदर से निकलने की कोशिश कर रही थी पर मेरी वाइफ सुनीता ये सब देखकर मुस्करा रही थी और चारो औरते चाय पीने और गप्पे मरने में बिजी थी। 



मैं किसी तरह से बच्चे को एडजस्ट कार रही थी और सुनिता ये सब देख कर मुस्करा रही थी लेकिन मेरे को तो शर्म आ रही थी क्युकी मैं तो मर्द हु भले हालातों ने मुझे एक औरत की तरह सजने और औरत वाले काम करने को मजबूर कर दिया है। खैर मैं ये जाहिर नहीं होने देना चाहता था की मैं एक औरत नहीं हु. किसी तरह सड़े उस बच्चे को एक औरत की तरह से ही संभल रहा था। तभी एक सहेली बोल उठी अरे बाई लगता है की तुमको छोटे बच्चे को सँभालने का काफी अनुभव हैं। कितने बच्चे हैं तुम्हारे। इससे पहले मैं बोल पता सुनीता बोल पड़ी अभी तो एक भी नहीं हैं , इसका पति ज्यादा कमा नहीं पता तभी तो मेरे यहाँ काम करती है। यह सुनकर मेरी आँखें नीची हो गई। पर सहेली जिसका ये बच्चे था बोल उठी कोई बात नहीं आगे बच्चा जरूर होगा। अरे सुनीता ये बताओ ये तुम्हारे यहाँ का काम कितने समय तक ख़तम कर लेती है। 12 बजे तक सुनीता बोली। तो फिर इसे दोपहर में दो घंटे के लिए मेरे घर भेज दिया करो थोड़ी देर मेरे बच्चे को संभल लेगी और इसको ज्यादा पैसे भी मिल जायेंगे। क्यों बसंती बाई आओगी मेरे यहाँ। मैंने कुछ जबाब नहीं दिया , पर सुनीता बोल पड़ी है है क्यु नहीं , जरूर जाएगी। मेरे और देखते हुए सुनीता बोली , देखो ये मेरी खास सहेली हैं कल से तुम इनके यहाँ चली जाना। जी बीवी जी मैं चली जाउंगी , मैंने धीमी आवाज़ में उत्तर दिया।

 

 

सब लोग बातों में बीजी थे और इधर वो बच्चा मेरी गॉद में ही सो गया था मैंने खा ये तो सो गया है इस पर वो बोली गोद में ही लेकर बैठी रहो थोड़ी देर अभी जग जायेगा नहीं तो। मैंने खा ठीक हैं दरसल उस बच्चे ने मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ रखा था सो मैंने भी उसे नहीं छेड़ा और व्ही उसे लेकर सोफे पे बैठ गई। उधर एक और गड़बड़ी हो गई उस बच्चे ने मेरे उप्पेर पेशाब कर दिया मेरी साड़ी और पेटीकोट भीग गया था , ये देखकर सहेलिया हसने लगी और बोली अब तुम तो बसंती को अपनी परमा नेट नौकरानी बना लो , देखो तुम्हारा बच्चा कैसे सो रहा हैं जैसे मम्मी की गोदी में सोया हो। मैं रही थी की आज का कैसा है मैं एक मर्द होते हुए भी औरत के रूप हु आस पास सुन्दर सुन्दर लेडीज हैं पर मेरे लिंग मेंकोई हरकत नहीं हो रही है , पहले जब भी मैं औरत के बीच में होता तो मेरा लिंग खड़ा हो जाता था शायद ये सब सुनीता की दवा का ही असर था। मई अपने फ्यूचर के बारे में भी सोच रहा था की क्या यही मेरा फ्यूचर है मर्द होते हुए भी औरत की जिन्दगी जीने को मजबूर होना।

मैं बच्चे को लेकर बैठी थी और चारो सहेलियों के साथ सुनीता प्लेइंग कार्ड्स खेल रही थी बीच बीच में वे लोग अपने हंसी मजाक में मेरा भी इस्तेमाल कर लेती थी , अक्सर कमेंट करने के लिए सुनीता अक्सर ऐसी बाटे बोलती थी जिसमे मर्द को नाकारा बताया जाता था। उनकी सहेलिया भी शायद इसी माइंडसेट की थी मर्द नाकारा हो तो उसे ही औरत बन के घर के सारे काम करने चाहिए। ये सब सुनकर मुझे बहुत बुरा लग रह था। वो लोग सेक्स वाली बाटे भी कर रही थी शायद कोई और टाइम होता तो मेरा लिंग कब का काळा नाग जैसा खड़ा हो जाया करता पर आज मैं एक नामर्द की तरह साड़ी ब्लाउज पहने बैठा था और मेरे लिंग में भी कोइ तनाव नहीं था।ये सब समय का फेर हैं मैंने खुद को समझाया। बच्चा अचानक से जग गया मैंने सोचा की शायद अब वो रोयेगा और उसकी मम्मी उसे ले लेगी पर हुआ इसका उल्टा वो अब मेरी गोदी में आराम से खेल रहा था , मैं भी उसे एक औरत की तरह से खिला रही थी. तभी उसने मेरी नथनी को जोर से खींच लिया अभी नक् छिड़े ज्यादा दिन नहींहुए थे सो मुझे जोर का दर्द हुआ और मेरी आँखों में आंसू आ गए. . पर मैं अपने दर्द को पीकर भी बच्चे को खिलाती रही। कुछ देर बाद मैंने बच्चे को सुनीता की सहेली को दे दिया और खुद शाम का खाना तैयार करने लगी मैंने खाना बना के सब को खिला दिया तभी मिस्टर कैलाश आ गए वो मोना के पति थे जिसका बच्चा था वो बोले अच्छा तो ये हैं सुनीता की नौकरानी जो मेरे बच्चे को संभल रही है आज दिन में , मैंने उनको नमस्ते किया आज पता नहीं क्यों मेरे अंदर एक अलग से फीलिंग आ गई , मैं सोचने लगी की अगर मैं सच मुछ की औरत होती तो ऐसे ही मर्द से शादी करती। सुनीता मेरी तरफ देखकर के बोली ये ही हैं मोना ना के हस्बैंड कल से तुमकोईनके ही बच्चे को संभाले के लिए जाना है। है है ठीक हैं मई चली जाउंगी , मैंने कहा मेरी शरीर में कैलाश को लेकर एक अलग सा ही रिस्पांस हो रहा था हजो मैं खुद भी नहीं समझ पा रहा था।

 

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